पूजा विधि

पूजा हमेशा विधि-विधान और पवित्रता के साथ करनी चाहिए. साथ ही पूजा के दौरान कुछ नियमों का पालन भी करना चाहिए. सही विधि से पूजा करने पर ही संपूर्ण फल की प्राप्ति होती है।

 

हिंदू धर्म में सभी घरों में पूजा-पाठ किए जाते हैं. हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, व्रत और अनुष्ठान का विशेष महत्व होता है. पूजा करना भगवान के प्रति आस्था, श्रद्धा और विश्वास को दर्शाता है. जब व्यक्ति भगवान की पूजा करता है तो वह सांसारिक मोह-माया को भूल आध्यात्मिक संसार में पहुंच जाता है. इससे मन को शांति और सद्भावना अहसास होता है. लेकिन पूजा का फल तभी प्राप्त होता है जब इसे सही विधि-विधान के साथ किया जाए।

 

हम सभी भगवान की पूजा करते हैं. लेकिन इसके बावजूद भी हमारी कुछ मनोकामनाएं पूर्ण नहीं होती. दरअसल यह सब पूजा के दौरान जाने-अनजाने में हुई गलतियों के कारण होता है. इसलिए हमें पूजा का सपूंर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता. इतना ही गलत विधियों से की गई पूजा दुर्भाग्य का कारण बनती है. हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा- पाठ करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है भगवान की विधि-विधान से पूजा करने पर सभी तरह के फलों की प्राप्ति होती है।

 

पूजा के माध्यम से हम ईश्वर के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और धन्यवाद प्रकट करते हैं. घर के अलावा मंदिरों में भी नियमित तौर पर देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. घर, मंदिर और अनुष्ठान सभी में पूजा की विधियां बदल जाती है क्योंकि समय और परिस्थिति के अनुसार छोटी या बड़ी पूजा की जाती है. छोटी पूजा की बात करें तो इसमें घर पर नियमित तौर से की जाने वाली पूजा-पाठ शामिल होती हैं, जिनमें आमतौर पर पंचोपाचार पूजा विधि का पालन कर सकते हैं. वहीं विस्तृत पूजा की बात करें तो इसके लिए दशोपचार और षोडशोपचार विधि का पालन करना पड़ता है. शास्त्रों में पूजा करने के लिए कुछ जरूरी विधियां बताई गई हैं, जिन्हें पंचोपचार, दशोपचार और षोडशोपचार पूजन विधि कहा जाता है.

 

पंचोपचार पूजन विधि :- इसमें पांच विधियों से पूजा की जाती है, जिसमें गंध, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य शामिल होता है. सबसे पहले भगवान को गंध यानि चंदन, हल्दी या कुमकुम का तिलक लगाएं. ताजे पुष्प अर्पित करें. फिर धूप या अगरबत्ती लगाएं. इसके बाद दीपक प्रज्जवलित करें और आखिर में नैवेद्य निवेदित करें. 

 

दशोपचार पूजन विधि :- इसमें 10 चरणों के साथ भगवान की पूजन की जाती है, जिसमें पाद्य, अर्घ्य, आमचन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य शामिल होते हैं. यदि आपके घर पर मंदिर है और आपने विधि-विधान से देवता को घर पर स्थापित किया है तो दशोपचार विधि से प्रतिदिन जरूर पूजा करें.  

 

षोडशोपचार पूजन विधि :- षोडशोपचार विधि से पूजा करने पर 16 चरणों में पूजा की जाती है. इसमें पाद्य, अर्घ्य, आमचन, स्नान, वस्त्र, उपवस्त्र (यज्ञोपवीत या जनेऊ) आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, स्तवन पाठ, तर्पण और नमस्कार किया जाता है.

 

  • - इनके अलावा विभिन्न देवी देवताओं की अपनी अलग-अलग पूजा विधि होती है l

 

श्री शिव पूजा विधि  :- सोमवार का दिन भगवान शिव को प्रिय है। यही वजह है कि इस दिन भगवन भोलेनाथ की पूजा और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सोमवार के दिन भगवान महादेव की सच्चे मन से पूजा-व्रत करने से साधक को बिजनेस में सफलता मिलती है और धन का लाभ मिलता है। ऐसा माना जाता है कि अगर भगवान शिव की पूजा विधिपूर्वक और अंत में आरती की जाए, तो ईश्वर प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा साधक पर सदैव बनी रहती है।

 

विधि :-

  1.  सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और दिन की शुरुआत भगवान शिव के ध्यान से करें।
  2.  अब स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।  
  3.  सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  4.  पंचामृत से विधिपूर्वक भोलेनाथ का अभिषेक करें।
  5.  अब एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।
  6.  अब उन्हें सफेद चंदन का तिलक लगाएं।
  7.  इसके बाद महादेव को सफेद फूल, धतूरा, भांग और बेलपत्र अर्पित करें।
  8.  देशी घी का दीपक जलाएं और आरती करें।  
  9.  सोमवार की व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
  10.  इसके बाद खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएं।  
  11.  अंत में लोगों में प्रसाद का वितरण करें और खुद भी ग्रहण करें।   

 

माँ पार्वती पूजा विधि  :-  माँ पार्वती भगवान शिव की अर्धांगिनी और भगवान गणेश की माता है। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह के समय माँ पार्वती की पूजा करने का बहुत ही महत्व होता है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण “पार्वती” और अत्यंत गौरवर्ण होने की वजह से  “गौरी”         कहलाई   जाती है। माँ गौरी को सभी देवियों की स्वामिनी कहा जाता है। गौरी पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। देवी की पूजा करके उन्हें प्रसन्न करने से घर में खुशहाली आती है और धन-धान्य में बढोत्तरी होती है।

 

विधि :-

  1.  पूजा की शुरूआत भगवान गणेश की पूजा के साथ करनी चाहिए।
  2.  इसके बाद देवी पार्वती की पूजा शुरू करे और देवी पार्वती की मूर्ति भगवान शिव के बाएं ओर स्थापित करे।
  3.  अब माँ पार्वती का आवाहन करे और उसके बाद देवी का जल ओर पंचामृत से स्नान कराएं।
  4.  देवी पार्वती को वस्त्र और आभूषण पहनाएं। फिर कुमकुम, चावल, दीपक, धूपबत्ती, पुष्प आदि चीजें माँ को अर्पित  करें।
  5.  इसके बाद देवी पार्वती की कथा पढे और उसके बाद आरती करे।
  6.  माँ को प्रसाद के रूप में नारियल, मिठाई, पंचामृत, सूखे मेवे आदि का भोग लगाया जाता है।

 

श्री गणेश पूजा विधि  :- विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले की जाती है. बिना इनके आशीर्वाद के नया काम संभव कैसे है. आपको किसी भी तरह की परेशानी हो बस उनका नाम लेने से तकलीफ दूर हो जाती है।

 

विधि  :-

  1.  स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
  2.  भगवान गणेश को प्रणाम करें और तीन बार आचमन करें
  3.  माथे पर तिलक लगाएं। 
  4.  मूर्ति स्थापित करने के बाद गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं।
  5.  वस्त्र, जनेऊ, चंदन, दूर्वा, अक्षत, धूप, दीप, शमी पत्ता, पीले पुष्प और फल चढ़ाएं।
  6.  पूजन आरंभ करें तथा अंत में गणेश जी की आरती करें
  7.  मनोकामना पूर्ति के लिए आशीर्वाद मांगे।

 

श्री कार्तिकेय पूजा विधि  :- भगवान कार्तिकेय का विधि-विधान से पूजन और व्रत करने से भक्तों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

 

विधि  :-

  1.  ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर लें.
  2.  इसके बाद घर के मंदिर की सफाई करें.
  3.  अब एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा स्थापित करें.
  4.  इनके साथ ही शंकर-पार्वती और गणेश जी की मूर्ति भी स्थापित करें.
  5.  इसके बाद कार्तिकेय जी के सामने कलश स्थापित करें.
  6.  पहले गणेश वंदना करें.
  7.  संभव हो तो अखंड ज्योत जलाएं.
  8.  सुबह शाम दीपक जरूर जलाएं.
  9.  इसके उपरांत भगवान कार्तिकेय पर जल अर्पित करें और नए वस्त्र चढ़ाएं.
  10.  पुष्प या फूलों की माला अर्पित कर फल, मिष्ठान का भोग लगाएं.
  11.  आरती के बाद मंत्रों का जाप करें.

 

माँ दुर्गा पूजा विधि :- दुर्गा माता की पूजा से घर में आर्थिक समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है. वहां की धन और संपत्ति में वृद्धि होती है. कष्टों का निवारण: दुर्गा माता की पूजा से अधिकांश कष्टों और संघर्षों का समाधान होता है. यह व्यक्ति को विपत्तियों से मुक्ति प्रदान करता है और उन्हें साहस और संयम में सहायता करता है।

 

विधि :-

  1.  पूजा की शुरुआत देवी दुर्गा के ध्यान और आह्वान से होती है।
  2.  देवी दुर्गा को आसन प्रदान करना है l
  3.  पैर धोने के लिए जल अर्पित करना है l
  4.  देवी दुर्गा को सुगंधित जल अर्पित करना है l
  5.  आचमन के लिए जल अर्पित करना है l
  6.  स्नान के लिए जल अर्पित करना है l
  7.  नए वस्त्र के रूप में मोली अर्पित करना है l
  8.  आभूषण अर्पित करना है l
  9.  देवी दुर्गा को चंदन, रोली, काजल, सौभाग्य सूत्र, सुगंध, हल्दी, अक्षत (अखंडित चावल), पुष्पांजलि, बिल्वपत्र, धूप, दीप, नैवेद्य, ऋतुफल, आचमन, नारिकेल (नारियल), ताम्बूल (सुपारी सहित पान), अर्पित करना है l
  10.  देवी दुर्गा को दक्षिणा (उपहार) अर्पित करना है l
  11.  अब देवी दुर्गा की आरती करनी है l
  12.  दक्षिणा अर्पित करने के बाद, अब उन पुस्तकों की पूजा करनी है, जिनका उपयोग किया जाता है।
  13.  पूजा के बाद कन्याओं को आमंत्रित कर उन्हें स्वादिष्ट भोजन करना है और दक्षिणा यानी उपहार देना है l
  14.  प्रतीकात्मक प्रदक्षिणा (देवी दुर्गा की बाएं से दाएं परिक्रमा) कर पुष्प अर्पित करना है l
  15.  अब पूजा के दौरान हुई किसी भी ज्ञात-अज्ञात गलती के लिए देवी दुर्गा से क्षमा माँगनी हैl

 

 

श्री राम पूजा विधि   :- घर में भगवान राम की पूजा करने से परिवार में एकता बनी रहती है। प्रतिदिन श्रीराम की पूजा करने से कष्ट दूर हो जाते हैं। जिस घर में राम नाम का जाप होता है। वहां हमेशा सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। जातकों की निर्णय लेने की क्षमता और रचनात्मकता बढ़ती है। भगवान राम की पूजना करने से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

विधि   :-

  1.  सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। साफ कपड़े पहनें।
  2.  भगवान राम की तस्वीर या मूर्ति को गंगा जल से शुद्ध कर लें।
  3.  माता सीता को धरती की पुत्री कहा जाता है। इसलिए कलश की पूजा के बाद धरती माता की पूजा करें।
  4.  पूजा की शुरुआत श्रीराम के चरण कमलों से करें।
  5.  दूध, दही, घी, गंगाजल और शहद अर्पित करें।
  6.  पुष्प, रोली और अक्षत से पूजा शुरू करें।
  7.  घी का दीपक और कपूर जलाकर आरती करें।
  8.  पूजा के बाद प्रसाद के रूप में पंचामृत ग्रहण करें और वितरण करें l

 

श्री कृष्ण पूजा विधि  :- सम्पूर्ण जगत में ही भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाति हैं । अलग-अलग मान्यता वाले भक्त अलग-अलग तरह से भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। कोई भगवान के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की सेवा करते हैं, तो कोई भगवान के मुरलीधर स्वरूप की पूजा और आरती करते हैं। संन्यासी भगवान श्री कृष्ण को अपना स्वामी कहकर निरंतर मंत्र जाप और भगवान की सेवा करते हैं।भगवान श्री कृष्ण की श्रद्धा भाव से पूजा करने से भक्तों को अद्भुत लाभ भी प्राप्त होता है l

 

विधि  :-

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  2. घर के मंदिर में साफ- सफाई करें।
  3. घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  4. सभी देवी- देवताओं का जलाभिषेक करें।
  5. इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है।
  6. लड्डू गोपाल का जलाभिषेक करें।
  7. इस दिन लड्डू गोपाल को झूले में बैठाएं।
  8. लड्डू गोपाल को झूला झूलाएं।

 

श्री राधा पूजा विधि  :-   श्रीकृष्ण को पाना है तो ‘राधा’ को भजो। अर्थात राधा ही कृष्ण हैं और कृष्ण ही राधा हैं। राधिका हिन्दू धर्म की प्रमुख देवी हैं। वह कृष्ण की संगिनी और प्रेमिका के रूप में चित्रित की जाती हैं। इस प्रकार उन्हें राधा कृष्ण के रूप में पूजा जाता हैं।

 

विधि  :-

  1. पूजा घर को अच्छी तरह साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें
  2. चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर उसपर राधा रानी की प्रतिमा या फोटो स्थापित करें।
  3. राधा जी के आगे मिट्टी या तांबे का कलश में जल, सिक्के और आम के पत्ते रखकर उस पर नारियल रखें।
  4. राधा रानी जी को पंचामृत से स्नान कराएं
  5. प्रसाद वितरण करेंl

 

श्री पंचमुखी हनुमान पूजा विधि  :-    मंगलवार का दिन पवनपुत्र हनुमानजी के लिए समर्पित होता है। इस दिन इनकी पूजा करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं एवं भक्तों पर आने वाले किसी भी प्रकार के कष्ट का निवारण कर देते हैं, इसी कारण हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। हनुमान जी की उपासना से सुख, शांति, आरोग्य एवं लाभ की प्राप्ति होती है एवं नकारात्मक शक्तियां भी हनुमानजी के भक्तों को परेशान नहीं करती।

 

विधि  :-

  1. सर्वप्रथम हमें अपने घर में पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर लानी होगी
  2. मंगलवार के दिन सूर्योदय से पूर्व दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  3. इसके पश्चात यदि आपको मंदिर जाना है तो वहां जाएं या फिर अपने पूजा घर में चौकी पर आसन लगाकर बैठ जाएं।
  4. आपका मुख दक्षिण की ओर रहे।
  5. हनुमान जी को जल और पंचामृत से स्नान कराएं।
  6. लाल गुलाब या फिर लाल फूल चढ़ाएं।
  7. इसके पश्चात सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
  8. पंचमुखी हनुमान जी को गुड़ व चने का भोग लगाएं।
  9. हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।
  10. हनुमान जी को लाल लंगोट अर्पित किया जाता है।
  11. प्रसाद वितरण करें l